महत्वपूर्ण मुद्दे

जाती या धर्म विशेष भेदभाव


जाती या धर्म यह हमारे व्यक्तिगत या सामाजिक विषय है ! इसमें प्रशासनिक या राजनीतिक दखल नही होना चाहिए ! साथ जाती या धर्म का राष्ट्रीयकरण नही होना चाहिए ! आज जब युग भौतिक विकास की ऊंचाई को छू रहा है , वहां आज भी व्यक्ति की पहचान उसकी जाती या धर्म से हो ,यह उचित नही है ! शादी विवाह या अन्य परम्पराओं का सभी को अपने अपने स्तर पर पालन करने का अधिकार होना चाहिए . इसमे प्रशासनिक या राजनीतिक दखल देने का अर्थ है उनके भावनाओं को ठेस पहुँचाना ! यह प्रशासनिक या राजनीतिक विषय नही हो सकता !
अब जाती या धर्म आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को समाप्त करने का समय आ गया है . भारत को वैश्विक शक्ति बनाना है तो जातिवाद जैसे मुद्दों पर राजनीतिकरण समाप्त करना होगा . प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भी भारतीय की पहचान उसकी जाती या धर्म के रूप में अंकित न हो अपितु वह एक सिर्फ भारतीय नागरिक की दृष्टि से देखा जाय ! जब हमारा देश धर्म निरपेक्ष है तो सरकारी कागजों में किसी को उसका धर्म क्यों पूछा जाता है ? क्यों किसी को धर्म के आधार पर अलग बांटा जाता है ? क्यों किसी धर्म विशेष को धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक या बहु संख्यक के रूप में विभाजित किया गया है ? क्यों किसी धर्म विशेष के आधार पर कुछ सुविधाएँ दी जाय और किसी को नही ? जब देश संविधान से चलता है और संविधान किसी के साथ जाती या धर्म के आधार पर भेदभाव की इजाजत नही देता तो यह सब धर्म आधारित विभाजन या व्यवस्थाएं क्यों है ?
इसे समाप्त कर एक सामाजिक एकता के साथ राष्ट्र का निर्माण हो , प्रत्येक नागरिक को एक भारतीय की नजर से देखा जाय ! जिस सुविधा की जिसे वास्तव में आवश्यकता हो दी जाय , परन्तु उसके लिए उसकी जाती या धर्म विशेष को आधार न बनाया जाय !
यही " वर्ल्ड प्रेस क्लब " की मुख्य विचारधारा है और राष्ट्र के निर्माण में एकता और समरसता को स्थापित करने के लिए हम सख्ती से काम लेने में भी नही चुकेंगे !



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